पिछले कुछ वर्षों से वास्तु शाश्त्र का चलन जोरो पर है.हालांकि यह विषय प्राचीन काल से चला आ रहा है पर इसका जोर पिछले ही कुछ वर्षों से है.कहते है हमारे पूर्वज किसी भी भवन का निर्माण वास्तु को ध्यान में रखते हुए हि करवाते थे.पर जैसे जैसे हम तरक्की की राह पर आगे बढते गए हमने पुराने रीती रिवाज, तौर तरीके इत्यादि का पालन करना कम कर दिया.पर पिछले १०-१५ सालो से हमने वास्तु पर फिर से ध्यान देना शुरू किया है.आज अधिकांश लोग किसी भी निर्माण के पहले वास्तु का पालन जरुर करना चाहते है.कई लोग तो अपने पुराने मकानों को भी वास्तु के अनुसार तोड़ फोड कर बनवा रहे है.
क्या हमने कभी सोचा है कि अचानक से हमे इस पुराने शाश्त्र के सहारे की जरुरत क्यों पड़ने लगी है? कई लोग जो इस शाश्त्र में कम या न के बराबर विश्वास रखते है उनका भी यही पूछना है की जब वास्तु नहीं था तो कोई परेशानी नहीं थी तो अब क्या हो गया जो की उसी घर में रहते हुए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिसमे कभी खुशहाली थी?
आज की भाग दौड की जिंदगी में हम यह देखना भूल गए है की पहले की बनिस्पत आज हम कहा आ गए है, हमारी दिनचर्या क्या हो गयी है, हमारी जीवन शैली कैसी हो गयी है इत्यादि. हमारे पूर्वज गावों में रहा करते थे जहाँ उनका खान पान,वातावरण इतना शुद्ध था की उनकी ऊर्जा सकारात्मक होती थी.उस ज़माने में न तो इतने सयंत्र थे न ही इतना विज्ञान ने उन्नति की थी.इस वजह से वातावरण की उर्जा सकारात्मक होती थी.पर आज जहाँ देखो वहाँ आधुनिक सयंत्रो का प्रयोग हो रहा है,जगह जगह पर मोबाइल के टावर लगे है जिनसे हवा में नकारात्मक तरंगे बहती रहती है जो की हमारे स्वास्थ की दृष्टि से काफी हानिकारक है.इसी प्रकार से कई बाते है जिनके कारण हमे आज के जीवन में वास्तु का मूल्यांकन करना अति आवश्यक हो गया है.
वास्तु का नाम आते ही अधिकाँश लोगो के मन में विभिन्न प्रकार की भ्रांतियां उत्पन्न हो जाती हैं.इधर उधर की किताबों व टी,वि इत्यादि की माध्यम से लोगों को वास्तु से सम्बंधित आधारहीन बातें बताई जाती है जिससे उनके मन में डर उत्पन्न हो जाता है.वास्तु हमारी जिंदगी में महत्वपूर्ण जरुर है पर इसका पूर्ण ज्ञान होना अति आवश्यक है.आज जिसे देखो हर दूसरा आदमी वास्तु की कुछ किताबों को पढ़ कर खुद को वास्तु विद् मानने लगता है.अपने परिवार व मित्रों को मुप्त में सुझाव देने लगता है जिससे उनका नुकसान भी हो सकता है.
वास्तु में आम धारणा बन गयी है की किसी विशेष दोष से कुछ निश्चित प्रभाव पड़ता है.पर यह गलत धारणा है.प्रत्येक व्यक्ति की ऊर्जा क्षमता विभिन्न होती है और वास्तु दोष का प्रभाव भी उसीके अनुसार पड़ता है.कई मामले में हमने देखा होगा की किसी व्यक्ति की आर्थिक स्तिथि व समृधि एक समय में काफी प्रबल है पर कुछ वर्षों में ही उसके वन्सजो को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.तब हमारे मन में निश्चित ही एक सवाल आता है की इसी घर में रहते हुए इनके पूर्वजो ने खुशहाली से जिंदगी व्यतीत की पर इनके साथ क्या हुआ? इसका विश्लेषण कर के देखा जाये तो हम पायेंगे की पूर्वजो के समय उनकी ऊर्जा काफी शशक्त थी और वास्तु दोष का प्रभाव उन पर न के बराबर रहा पर वन्सजो के वक्त उनकी उरजा इतनी कमजोर होती गयी की वास्तु दोष उन पर हावी हो गया और एक बार जो वास्तु दोष हावी हो जाए तो समझिए की फिर वो बिना सुधार के ठीक ही नहीं हो सकता.
दुसरे नजरिये से समझे तो उदहारण के तौर पर सोचिये की हमने एक मोटरसाइकिल खरीदी.अगर इसमें कोई प्रकार की तृती है तो भी वो तुरंत सामने नहीं आती है.कुछ समय के बाद जब वो पुरानी हो जाती है तो निरंतर परेशानियों का सामना करना पड़ता है.नयी में इसके दोष दब जाते है पर पुरानी होते ही इसकी प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है और हमे परेशानियों का सामना करना पड़ता है.ठीक इसी प्रकार वास्तु दोष एक बार अगर हम पर सवार हो जाये तो फिर हमे निरंतर निचे ही ले जाता है.
किसी भी भवन, भूमि इत्यादि की एक निश्चित उम्र होती है जो की वास्तु पद्दति से निकाली जाती है.उस उम्र के बाद उस भवन या भूमि की ऊर्जा लगभग सुन्य हो जाती है.उसे फिर से ऊर्जा प्रदान करने के लिए हमे भवन के वास्तु दोषों का निवारण करना चाहिए तथा कुछ उर्जित संयंत्रों द्वारा ऊर्जा प्रदान करनी चाहिए.इससे भवन की ऊर्जा सकारात्मक हो जाती है.
वास्तु दोष निवारण से पहले हमे यह जन लेना आवश्यक है की क्या वाकई हमारे घर में दोष है?अगर है तो क्या क्या और कहाँ कहाँ ? जिस तरह जब तक एक डाक्टर यह नहीं जान लेता की बिमारी क्या है तब तक वो सही दावा नहीं दे सकता ठीक उसी तरह जब तक वास्तु का सही तरीके से मूल्यांकन न हो जाये तब तक उसे ठीक करना मुश्किल ही नहीं नमुमकिन है.यूँ तो वास्तु विशेषज्ञों के नाम पर कई लोग अपनी दुकाने चला रहें है पर हमे सही विशेषज्ञ की जरुरत है.हमें किसी भी विशेषज्ञ से मिलने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए.
वास्तु के अनुसार ९ दिशाएं होती है.प्रत्येक दिशा का अपना महत्व होता है.जैसे इशान ऊर्जा स्त्रोत्र है तो अग्नि आग से सम्बंधित, वायव्य वायु को दर्शाता है तो नैरत्य स्वामी को.प्रत्येक दिशाओं से कुमार जीवन प्रभावित होता है.जैसे अगर इशान से सम्बंधित कोई समस्या है तो हमे आर्थिक परेशानी व महिलाओं के स्वास्थ की समस्या आ सकती है.वायव्य गडबड है तो संतान की ओर से समस्या आ सकती है इत्यादि.
अब इन समस्याओं का हल कैसे किया जाये?
पिछले कुछ वर्षों तक वास्तु दोष निवारण का एक मात्र रास्ता था तोड़ फोड व भरी बदलाव.पर अब ऐसा नहीं है. आज हमारे पास कई और रास्ता है जिससे वास्तु दोषों को दूर किया जा सके.
१) हलके तोड़ फोड व बदलाव
२) दर्पण,तार इत्यादि (भारतीय पद्ति)
३) फेंग शुई (चाईनिज पद्ति)
४) पिरामिड वास्तु (मिश्र पद्ति)
५) इन सभी का मिश्रण
उपरोक्त सभी तरीके अपनी अपनी जगह पर सही है पर न.२ व ४ काफी लोकप्रिय और कारगर साबित हो रहा है. न.२ सस्ता व सरल उपाय है पर इसका असर एक धीमी गति से होता है.न.४ कुछ महंगा पर बहुत असरदार उपाय है.
अब हमे वास्तु दोष निवारण के लिए अनावश्यक तोड़ फोड और भारी बदलाव करने की कोई जरुरत नहीं रह गयी है.इसके लिए बस वास्तु दोष का पता लगा कर उसका निवारण उपरोक्त किसी भी तरीके से करा लेना चाहिए.
विकाश सेठी,
वास्तु व पिरामिड विशेषज्ञ,
रामगढ कैंट,
मो.९४३११४६१०८,९२३४६०१९३९